यूपी -सोनभद्र
दिनांक -19/7/2026
रिपोर्ट -सतीश दुबे -शत्रुघ्न कुमार

कंपनी के एचआर सुभाष गौतम पर रिश्वत मांगने काम छोड़ने कि धमकी का आरोप
कैंप में रह रहे मजदूरों से 10 हजार रुपये कि मांग का आरोप श्रमिकों का

आरोप टाइम कीपर वाघमारे के आदेश पर श्रमिकों से जबरन नाइट ड्यूटी करने के लिए विवश करतें हैं
मेस बंद कराने के नाम पर 10 हजार रुपये कि मांग एचआर द्वारा करने का आरोप श्रमिकों का
कई श्रमिक अब भी प्रबंधन के फैसले से असहमत

जिला प्रशासन कि चुप्पी श्रमिकों के शोषण का बन रहा कारण
सोनभद्र। शक्तिनगर स्थित एनसीएल खड़िया परियोजना में ओबी निकाल रही एसए यादव कंपनी पर समय पर मजदूरी का भुगतान न करने , छुट्टी का पैसा न देने, कैंप में रह रहे मजदूरों से एचआर सुभाष गौतम द्वारा मेस का बिल बंद करने के नाम पर 10 हजार रुपये कि मांग, श्रमिकों से जबरन नाइट शिफ्ट ड्यूटी कराने, नाइट ड्यूटी न करने पर कार्य से बैठाने , किसी कारणवश जो श्रमिक छुट्टी पर जाते हैं वापस आने पर कुछ दिनों के लिए ड्यूटी से बैठाए जाने सहित विभिन्न मांगों को लेकर शनिवार रात कैंप में ही धरना दिए इसके बाद रविवार सुबह एनसीएल खड़िया परियोजना महाप्रबंधक कार्यालय पर एनसीएल खड़िया व कंपनी प्रबंधन से वार्ता के बाद कुछ श्रमिकों के बीच आम सहमति के बाद धरना समाप्त हुआ। मिली जानकारी अनुसार श्रमिक संजीत कुमार ने बताया कैंप में रहने वाले श्रमिकों पर दबाव डालकर टाइम कीपर मुकेश झा नाइट शिफ्ट ड्यूटी करने के बाद भी लगातार बीच-बीच में नाइट ड्यूटी कराने का आरोप लगाया पूछने पर कहते हैं वाघमारे का आदेश है नहीं करोगे तो बाहर कर दिया जाएगा। श्रमिक का आरोप है कि कैंप छोड़ने कि बात पर कंपनी के एचआर सुभाष गौतम मेस का बिल बंद करने के नाम पर 10 हजार रुपये कि मांग करते हैं न देने पर बिल चालू रहने कि बात कहते हैं। श्रमिक ने बताया जो श्रमिक छुट्टी पर जाते हैं वापस आने पर उन्हें बिना कारण कुछ दिनों के लिए कार्य से बैठा दिया जाता है। श्रमिक ने बताया कि काम बंद नहीं किए थे वेतन भुगतान क्यों नहीं हो रहा है पूछने के लिए रात में श्रमिक प्रबंधन का इंतजार कर रहे थे काफी समय बाद प्रबंधन कि और एचआर सुभाष गौतम आकर बोलते हैं काम करना है करो नहीं तो जा सकतें हो अभद्रता को लेकर श्रमिकों में नाराजगी बढ गई और वह धरने पर बैठ गए। सुबह तक वार्ता आम सहमति न बनने पर सभी श्रमिक एनसीएल खड़िया परियोजना महाप्रबंधक कार्यालय पर पहुंचकर अपनी मांगों को रखें कंपनी प्रबंधन और श्रमिकों के बीच कुछ मुद्दों पर कुछ श्रमिकों के बीच सहमति बनने पर श्रमिक कार्य पर लौट गए। सवाल यह है कि सोनभद्र जिले में जितनी भी ओबी कंपनियां कार्य कर रही है सभी के खिलाफ लगातार श्रमिकों द्वारा शोषण वेतन भुगतान, मूलभूत सुविधाएं मुहैया न कराना, असुरक्षित माहौल में कार्य कराना, मूल मजदूरी न देना, सहित विभिन्न प्रकार कि समस्याओं कि शिकायतों के बाद भी एनसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन इन कंपनियों कि जांच कर कार्रवाई क्यों नहीं करता, आखिर क्या कारण है कि श्रमिकों के शोषण को लेकर जिला प्रशासन एवं जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। कंपनियों कै खिलाफ लगातार अन्य जिलों के लोगो कि भर्ती सहित रुपये लेकर नौकरी देने, विस्थापितो को रोजगार न देने, सहित तमाम तरह कि शिकायतें लगातार मीडिया में चलती रही है। आखिर क्या कारण है कि ट्रेड यूनियनों के वो नेता जो मजदूर हितों कि रक्षा के लिए बने संगठन क्यों मौन धारण किए हुए हैं। जिला प्रशासन को इस ओर ध्यान देकर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
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