यूपी -सोनभद्र
दिनांक -11/9/2026
रिपोर्ट -सतीश दुबे -शत्रुघ्न कुमार

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ग्रामीणों ने जांचकर जिम्मेदारो पर कार्रवाई कि मांग कि

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सोनभद्र। बीना। नार्दर्न कोल फिल्ड लिमिटेड (एनसीएल) की बीना और कृष्णशिला परियोजना के खदान क्षेत्र से निकलने वाला बरसाती पानी, पानी और कोयलायुक्त मलबा (Overburden – कोयले के ऊपर की मिट्टी-पत्थर) एक बार फिर विवादों में है। कल गुरुवार दोपहर बारिश के बाद घरसड़ी पहाड़ी के आजाद नगर टोला के करीब आधा दर्जन घरों में खदान क्षेत्र से निकला पानी और मलबा घुसकर ग्रामीणों के गृहस्थी के सामान को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया और दो तीन फिट तक घरों में पानी घुसा रहा जिस कारण इनमें एनसीएल के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने एनसीएल प्रबंधन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग की है।
वीओ – ग्रामीणों के अनुसार यह पानी- मलबा शक्तिनगर-वाराणसी मुख्य मार्ग पर कृष्णशिला महाप्रबंधक कार्यालय से करीब 300 मीटर पीछे शनिदेव मंदिर के पास स्थित नाले से होकर सीधे रिहन्द जलाशय में समाहित हो रहा है, जिस कारण जल प्रदूषण की आशंका भी बढ़ रही है। रिहन्द जलाशय क्षेत्र के लिए बड़ा पेयजल स्रोत है और इसके कैचमेंट (जलग्रहण क्षेत्र) में कई खदानें व ताप विद्युत परियोजनाएं हैं।
वीओ – नियम कहता है कि खदान का पानी बिना उपचार बाहर छोड़ना स्वीकार्य नहीं है। पानी को पहले Mine Sump (खदान में पानी इकट्ठा करने का गड्ढा) और सेंपलिंग पांड/ सीलटेशन पांड (तलछट जमाव तालाब) में एकत्र कर उपचार करना होता है और सीटीओ – Consent to Operate (संचालन की सहमति) तथा EC – इनवायरमेंटल क्लियरेंस (पर्यावरणीय स्वीकृति) की शर्तों का पालन करना होता है।
सीपीसीबी (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) के एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) रिकॉर्ड में भी उल्लेख है कि विभिन्न प्रक्रियाओं से निकलने वाले वेस्ट वाटर (अपशिष्ट जल) / Effluent (बहिःस्राव) को ETP – Effluent Treatment Plant (अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र) में ट्रीट कर Dust Suppression (धूल नियंत्रण के लिए छिड़काव), Overburden Irrigation और अन्य कार्यों में Reuse (पुनः उपयोग) किया जाए, ताकि (शून्य बहाव) की दिशा में काम हो।
वीओ – इसी संदर्भ में ककरी परियोजना का पुराना मामला भी है। एनजीटी की ओवरसाइट कमेटी (निगरानी समिति) ने वर्ष 2021 में Rihand में effluent पहुंचने के मामले में 27.60 लाख रुपये (पर्यावरण क्षतिपूर्ति) की सिफारिश की थी, हालांकि बाद में एनजीटी का आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा set aside (निरस्त) कर दिया गया था।
वीओ – ग्रामीणों ने मांग की है कि बीना, कृष्णशिला परियोजना से निकलने वाले वेस्ट पानी और रिहन्द के पानी के अलग-अलग नमूने लेकर मान्यता प्राप्त स्वतंत्र प्रयोगशाला में pH (अम्लता-क्षारीयता), TDS – Total Dissolved Solids (कुल घुले ठोस), आयरन, मैंगनीज, सल्फेट, भारी धातु आदि की जांच कराई जाए और हर घर जल योजना के स्रोत की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
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