मध्य प्रदेश-सिंगरौली
दिनांक -05-09-2026
रिपोर्ट -सतीश दुबे

जबलपुर/सिंगरौली। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में अधिवक्ता शिवेंद्र पांडेय की प्रभावी एवं तथ्यपरक पैरवी के बाद संजीव कुमार पांडेय को बड़ी कानूनी राहत मिली है। वैढ़न थाने में दर्ज दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं के मामले में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए संबंधित FIR एवं उससे जुड़ी कार्यवाही को निरस्त कर दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता शिवेंद्र पांडेय ने न्यायालय के समक्ष प्रकरण से जुड़े कानूनी एवं तथ्यात्मक पहलुओं को मजबूती से रखा। उनकी ओर से तर्क दिया गया कि विवाह का वादा बाद में पूरा न होना अपने आप में दुष्कर्म का अपराध नहीं बनता। इसके लिए यह देखना आवश्यक है कि क्या विवाह का वादा शुरुआत से ही झूठा था और क्या आरोपी की मंशा उस समय से ही विवाह करने की नहीं थी।
अधिवक्ता पांडेय ने न्यायालय के समक्ष सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णयों—Pramod Suryabhan Pawar, Sonu @ Subhash Kumar तथा Dr. Dhruvaram Murlidhar Sonar का भी हवाला दिया। इन निर्णयों के आधार पर उन्होंने यह पक्ष रखा कि विवाह के वादे से जुड़े मामलों में शुरुआत से ही धोखाधड़ीपूर्ण मंशा और बाद में परिस्थितियों के कारण विवाह न हो पाने के बीच कानूनी अंतर को देखा जाना जरूरी है।
पैरवी के दौरान बचाव पक्ष की ओर से यह भी तर्क रखा गया कि मामले में उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायहित में उचित नहीं है।
हाईकोर्ट द्वारा संबंधित FIR और उससे जुड़ी कार्यवाही निरस्त किए जाने के बाद संजीव कुमार पांडेय को बड़ी कानूनी राहत मिली है।
हालांकि, किसी भी आपराधिक मामले में न्यायालय के आदेश और रिकॉर्ड में उपलब्ध तथ्यों को ही अंतिम आधार माना जाता है। इस मामले में भी हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप ही कानूनी स्थिति तय होगी।
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