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*सोनभद्र कलिंगा एनसीएल खड़िया व कुछ श्रमिकों के बीच विभिन्न मांगों लीव के पैसे का भुगतान तीन माह में सैलरी में जोड़कर देने पर हुई बैठक*


यूपी -सोनभद्र

 

दिनांक 26/6/2026

 

रिपोर्ट -सतीश दुबे -शत्रुघ्न कुमार

 

 

कलिंगा कंपनी द्वारा किए जा रहे बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा उजागर, जिले के जिम्मेदार मौन

 

लीव के पैसे का भुगतान तीन माह में सैलरी में जोड़कर देने पर कुछ मजदूरों की सहमति ज्यादातर श्रमिक असहमत

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अब भी 12 घंटे ड्यूटी,22 दिन ड्यूटी,मेस , टायलेट,पीने का पानी, रेस्ट रुम, नियमित नाश्ता,सुरक्षा मानकों सहित कई बड़े भ्रष्टाचार कलिंगा कंपनी द्वारा किया जा रहा

 

कलिंगा कंपनी द्वारा करोड़ों का भ्रष्टाचार किया जा रहा जिला प्रशासन,श्रम विभाग व जिम्मेदार मौन

 

निकालें गए श्रमिक ने बताया ब्रिटिश अंग्रेजो से भी ज्यादा शोषण कलिंगा कंपनी के अधिकारियों द्वारा किया जा रहा

 

1.5 के बजाय 1.3 के अनुसार अवकाश भुगतान (लीव ) के अनुसार किया जाता है श्रमिकों का आरोप

 

एलएमवी वाहन चालकों से 12 घंटे ड्यूटी ली जाती है

 

एचपीसी चालकों को निर्धारित मानक अनुसार भुगतान नहीं किया जाता है

 

श्रमिक अब भी अपनी विभिन्न मांगों को पूरा नहीं होने से नाराज

 

अब भी श्रमिकों की मूलभूत सुविधाओं पर कोई निष्कर्ष नहीं

 

फिटनेस के नाम पर निकालें गए मजदूर को ड्यूटी कब दी जाएगी

 

बडा सवाल कंपनी में तेल आपूर्ति कहा से होती है

 

वाहनों का फिटनेस, वाहनों का रजिस्ट्रेशन अन्य राज्यों के नाम के जांच की जरुरत

 

जिन मजदूरों को 22 ड्यूटी दी जा रही क्या श्रम कानूनों का उल्लंघन नहीं

 

एनसीएल खड़िया के जिम्मेदार अधिकारी नियमों का पालन करने में विफल

 

एनसीएल खड़िया व कलिंगा कंपनी के अधिकारियों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार का खेल चल रहा

 

सोनभद्र। शक्ति नगर स्थित एनसीएल खड़िया परियोजना में ओबी निकाल रही कलिंगा कंसोर्टियम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के श्रमिकों कलिंगा कंपनी व एनसीएल खड़िया के अधिकारियों के बीच शुक्रवार को मजदूरों की विभिन्न मांगों को लेकर बैठक हुई। बैठक में शामिल कुछ मजदूरों ने बताया कलिंगा कंपनी के एचआर संजय यादव, प्रोजेक्ट मैनेजर आलोक चंद्रा व एनसीएल खड़िया परियोजना के अधिकारियों के बीच वार्ता हुई। बैठक में निष्कर्ष के रुप में मजदूरों ने बताया कि अवकाश ( लीव) भुगतान का पैसा तीन माह में सैलरी में तीन बार में जोड़कर किया जायेगा। हांलांकि बैठक के बाद बाहर आने पर ज्यादातर श्रमिकों ने असहमति जताते हुए कहा कि कंपनी द्वारा लिखित में आश्वासन नहीं मिला है इसलिए भरोसा नहीं किया जा सकता है, पिछले कुछ माह से यहीं चल रहा है। नाम न बताने की शर्त पर श्रमिकों ने आरोप लगाया कि कंपनी द्वारा एलएमवी चालकों से 12 घंटे ड्यूटी ली जाती है,100 से 200 श्रमिकों को 26 के बजाय 22 ड्यूटी दिया जाता है एफिडेविट पर अनापत्ति प्रमाणपत्र ले लिया गया है। एचपीसी चालकों को निर्धारित मानक अनुसार भुगतान नहीं किया जाता है। कुछ चालकों का वर्ष 2025 का वेतन भुगतान अबतक नहीं किया गया है। कलिंगा कंपनी द्वारा अबतक मेस की व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे जमीन पर बैठकर खाना खाना पड़ता है। टायलेट,पीने का पानी उपलब्ध नहीं है इतनी गर्मी में मजदूर ने बताया केवल एक लीटर पानी ही वहां से लिया जा सकता है पानी अपने घर से ही लेकर आने को बोला जाता है,सुरक्षा मानक (पीपीई ) नहीं है। श्रमिकों के लिए रेस्ट रुम के तौर पर कंटेनर रखे गए हैं जैसे किसी जानवर के लिए व्यवस्था हो आस-पास जंगल है जहां से जहरिले जीव-जंतु निकलकर वहा घुस जाते हैं बीते दिन बिच्छू तक निकल चुका है घायल व चोटिल होने पर उचित उपचार व्यवस्था भी नहीं।जिन श्रमिकों को फिटनेस के नाम पर ड्यूटी से बैठाया गया उन्हें अबतक कार्य ज्वाइन नहीं कराया गया फिटनेस प्रमाणपत्र देने के बाद भी। सवाल यह है कि समस्याए इतनी हैं, और किसी भी समस्या का अबतक ठोस समाधान नहीं किया गया है। सवाल यह भी है कि एनसीएल खड़िया परियोजना के महाप्रबंधक समेत सुरक्षा अधिकारी तक मामले से अवगत हैं, फिर भी श्रमिकों की समस्याओ का समाधान क्यों नहीं किया जा रहा है। क्या एनसीएल खड़िया परियोजना के अधिकारियों की मिलीभगत से ही कलिंगा कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर, एचआर नियमों का उल्लंघन कर भ्रष्टाचार कर रहे होंगे? श्रमिकों की ज्यादातर मांगे अनदेखी क्यों कर दी गई? हांलांकि डेढ़ दिन दूसरी पाली के मजदूर अधिकारियों के दबाव में आकर कार्य पर जाने को विवश हो गये। खबर लिखे जाने तक कुछ मजदूरों द्वारा अवकाश भुगतान (लीव) का पैसा तीन माह में सैलरी में तीन बार में जोड़कर देने पर सहमत हुए थे। जबकि अनुबंधों की बात करे तो मुख्य नियोक्ता एनसीएल खड़िया ही है। कलिंगा कंपनी श्रमिकों की नियुक्ति, वेतन और प्रबंधन सहित अनुबंध शर्तों के लिए जिम्मेदार है। श्रमिकों को निर्धारित न्यूनतम वेतन,समय पर भुगतान, सुरक्षा उपकरण (पीपीई) पेयजल, शौचालय, विश्राम व्यवस्था, सहित अन्य वैधानिक सुविधाएं मिलनी चाहिए। अगर कंपनी नियमों का पालन नहीं करती तो कुछ दशा में मुख्य नियोक्ता भी जिम्मेदार होता है। पीएफ, ईएसआई बोनस जैसी सुविधाएं भी समय पर नदारद है।

 

बाइट ( भोला सिंह श्रमिक व चालकों के इंचार्ज कलिंगा कंपनी एनसीएल खड़िया परियोजना शक्तिनगर सोनभद्र)

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