यूपी -सोनभद्र
दिनांक -11/6/2026
रिपोर्ट -सतीश दुबे -शत्रुघ्न कुमार

कोल व राख परिवहन के वाहन पटरियों पर खड़े रहने से पटरियां क्षतिग्रस्त हो रही,बढ़ रही दूर्घटना की आशंका

प्रदूषण सफाई के नाम पर परियोजनाएं करती है कोरम पूर्ति
सोनभद्र। ऊर्जांचल के बीना क्षेत्र में बीना से लेकर बांसी पेट्रोल पंप तक सड़कों सहित पटरियों की स्थिति बेहद खराब होती जा रही है। बीना महाप्रबंधक कार्यालय के पास तो लगातार कोयला व राख परिवहन के वाहन वाहनों को खड़ा कर तिरपाल बांधने का कार्य करते हैं जिससे पटरियां क्षतिग्रस्त हो रही है और प्रदूषण मे इजाफा हो रहा है , सड़क व पटरियों पर कोल व राख परिवहन के ओवरलोड वाहनों के खड़े होने से जहां पटरियां क्षतिग्रस्त हो रही तो दूसरी ओर इसके कारण प्रदूषण में लगातार इजाफा हो रहा है। बढ़ते प्रदूषण से स्थानीय सहित राहगीरों को भी प्रदूषण की मार झेलनी पड़ती है। प्रदूषण के कारण सबसे ज्यादा स्थानीय निवासियों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गर्मी के मौसम में जैसे ही कोयला व राख परिवहन में लगे वाहन सड़क से गुजरते है धूल का गुब्बार भी अपने साथ लेकर चलते हैं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार क्षेत्र के हवा के कारण उड़ने वाली धूल का स्तर खतरनाक स्तर को छू चुका है। राखड ( फ्लाई ऐश)और कोयले का परिवहन करने वाले ट्रकों और डंपरों को सही ढंग से ढके बिना परिवहन करने से यह सड़कों पर बिखरने लगती है यहां के धूल में पीएम10(PM10) एवं पीएम2.5(PM2.5) जैसे सूक्ष्म कण होते हैं यह हवा सीधे तौर पर अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, और फेफड़ों के रोगो को बढ़ावा देती है। सड़कों व पटरियों पर बिखरे कोयला मिट्टी व राख के के कारण विजिबिलिटी (दृश्यता) कम होने के कारण आएदिन सड़क दूर्घटनाए भी होती रही है। स्थिति को नियंत्रित करने हेतु सोनभद्र प्रशासन द्वारा निर्देश जारी किए गए हैं जिनमें कोयले व राखड का परिवहन केवल तिरपाल से ढके हुए और बंद कंटेनरों में करने के सख्त आदेश दिए गए हैं, जिनमें फ्लाई ऐश का परिवहन तो बंद कंटेनरों से करने का निर्देश एनजीटी द्वारा कड़ाई से अनुपालन कराने को कहा गया है किंतु सोनभद्र में इसके विपरित ही यह हो रहा है जिससे प्रदूषण की स्थिति भयावह होती जा रही है। गति सीमा और स्पीड गवर्नर भारी वाहनों की अधिकतम गति 25 किलोमीटर प्रतिघंटा तय की गई है और सभी भारी वाहनों को स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य किया गया है । सड़कों पर पानी का छिड़काव करने के सहित एंटी स्माग गन का इस्तेमाल सड़कों पर प्रदूषण कम करने के लिए कहा गया है। हांलांकि ऊर्जांचल में यह सभी नियम केवल कोरम पूर्ति के लिए किया जा रहा जिला प्रशासन व प्रदूषण विभाग को समय-समय यहां का दौरा कर स्थिति का आंकलन करना चाहिए लेकिन न तो जिला प्रशासन न प्रदूषण विभाग यहां कभी स्थिति जानने आता जिससे प्रदूषण की मार स्थानीय लोगों को झेलने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
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