
सोनभद्र :-
आपको को बता दे की उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले और मध्य प्रदेश के जिले सिंगरौली को देश का “एनर्जी कैपिटल” कहा जाता है, लेकिन इसी के साथ यह इलाका गंभीर प्रदूषण संकट से भी जूझ रहा है। यहां कोयला आधारित उद्योग, पावर प्लांट और खनन गतिविधियां लगातार
पर्यावरण और लोगों की सेहत पर असर डाल रही हैं। NCL जैसे कोयला बड़े बड़े खदान पर आधारित पावर प्लांट क्षेत्र में कई बड़े प्लांट जैसे NTPC और NCL संचालित हैं।इनसे निकलने वाली राख (फ्लाई ऐश) और धुआं हवा को जहरीला बना रहा है।खदानों से उड़ने वाली धूल सीधे गांवों तक पहुंचती है ट्रकों की आवाजाही से सड़कें धूलभरी रहती हैं जिस से आमजन को चलने में काफ़ी दिकतो का सामना करना पड़ता है कई जगहों पर राख के ढेर खुले में पड़े हैं बारिश में यह राख पानी में घुलकर रिहन्द जशय की और जल और जमीन को दूषित करती है कई बार AQI (Air Quality Index) खतरनाक स्तर (300+) तक पहुंच जाता है लोगों को सांस लेने में दिक्कत, खांसी और आंखों में जलन की शिकायत WHO मानकों के अनुसार यह स्थिति बेहद चिंताजनक मानी जाती है रिहंद डैम और आसपास की नदियों में औद्योगिक कचरा मिलने की शिकायत भूजल (Groundwater) में भारी धातुओं (Heavy Metals) की आशंका खेती की जमीन की उर्वरता कम हो रही है सांस की बीमारियां (Asthma, Bronchitis) तेजी से बढ़ रही हैं बच्चों और बुजुर्गों में ज्यादा असर त्वचा रोग और आंखों की समस्या आम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा समय-समय पर जांच और नोटिस पावर प्लांट को फिल्टर और डस्ट कंट्रोल सिस्टम लगाने के निर्देश ग्रीन बेल्ट (पेड़-पौधे) बढ़ाने की योजना प्रदूषण पर कड़ी निगरानी और सख्त कानून लागू हो प्रभावित गांवों का पुनर्वास (Rehabilitation) साफ पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं और भी तेज़ी से बढ़ाई जाएं!

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