यूपी -सोनभद्र
दिनांक -10/7/2026
रिपोर्ट- सतीश दुबे /शत्रुधन कुमार

जिला अस्पताल लोढी से प्रसुता को रेफर किया गया था,दलाल ने अवैध हेल्थकेयर सुरक्षित प्रसव का भरोसा दिलाया
परिजनों का आरोप अवैध क्लिनिक में उपचार में लापरवाही बरती गई

मौत बाद जगे, स्वास्थ्य विभाग ने अवैध क्लिनिक सील किया
एफआईआर कि तैयारी में जुटा स्वास्थ्य विभाग
प्रसुता कि स्थिति बिगड़ने पर वाराणसी रेफर किया गया जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित किया
नोडल अधिकारी का कहना है अवैध क्लिनिक के बारे में जानकारी होने पर कार्रवाई प्रक्रिया में थी
एंकर। सोनभद्र में राबर्ट्सगंज के इमरती कालोनी स्थित एक अवैध क्लिनिक में गुरुवार को जच्चा-बच्चा कि मौत के बाद परिजनों ने डाक्टरों पर उपचार में लापरवाही का आरोप लगाया है। वहीं मौत के हंगामे के बाद जगे स्वास्थ्य विभाग ने अवैध क्लिनिक को सील कर एफआईआर के तैयारी में जुटकर लीपापोती के प्रयास में हैं। परिजनों का आरोप है कि जिला अस्पताल लोढी से प्रसुता को रेफर किया गया जहां से कथित दलाल ने उन्हें बेहतर उपचार का भरोसा दिलाकर इमरती कालोनी स्थित क्लिनिक जाने कि सलाह दी जहां उपचार के दौरान जच्चा-बच्चा दोनों कि मौत हो गई मिली जानकारी और खबरों अनुसार गुरुवार को मृतक महिला के पति द्वारा पत्नी को प्रसव हेतु जिला अस्पताल लोढी ले जाया गया जहां से उन्हें रेफर कर दिया गया। लेकिन परिजन का आरोप है इसी दौरान कथित एक दलाल उन्हें गुमराह कर बेहतर उपचार का भरोसा दिलाकर राबर्ट्सगंज इमरती कालोनी स्थित सिंह हेल्थकेयर ले जाया गया जहां पहुंचने पर ब्लड कि कमी बताकर उनसे बाहर से ( ब्लड) लाने को कहा गया। पहले सामान्य प्रसव का प्रयास किया गया लेकिन सफलता न मिलने पर परिजनों का आरोप है कि अप्रशिक्षितो द्वारा उपचार करने से बच्चे कि मौत हो गई। प्रसुता कि हालत गंभीर होने पर उसे लाइफ सपोर्ट के सहारे वाराणसी रेफर कर दिया गया। परिजनों का आरोप यह भी है कि प्रसुता कि मौत क्लिनिक में ही हो गई थी इसके बाद भी उसे लाइफ सपोर्ट देकर वाराणसी भेज दिया गया। वाराणसी पहुंचने पर वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। खबरों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी गुलाब शंकर का कहना है कि संबंधित क्लिनिक के बारे में अवैध संचालन कि जानकारी प्राप्त हुई थी आवेदन विचाराधीन था, कार्रवाई से पहले यह घटना हो गई। क्लिनिक को सील कर एफआईआर कि प्रक्रिया चल रही है। अब सवाल यह है कि जिला मुख्यालय से कुछ दूरी पर ही इस तरह से अवैध क्लिनिक का संचालन हो रहा और विभाग बेखबर है। जिलें में कई बार इस तरह से जच्चा-बच्चा कि मौत का मामला प्रकाश में चुका है इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग मौत के बाद क्यों जागता है? क्या अधिकारी अपने एसी वाले दफ्तरों तक ही सीमित रह गये है?
बाइट ( मृतक प्रसुता महिला के पति सोनभद्र)
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