यूपी -सोनभद्र
दिनांक -3/11/2026
रिपोर्ट -सतीश दुबे -शत्रुघ्न कुमार

प्रतिनिधि व ग्रामीणों का आरोप मकान निर्माण सामग्री के आड़ में सरकारी भूमि पर अनाधिकृत रूप से कब्जा
ग्रामीणों का आरोप पूर्व में शिकायत बाद भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं किया था
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से जांच कराकर सरकारी भूमि से कब्जा हटवाने कि मांग कि
ग्रामीणों ने बताया कि म्योरपुर ब्लाक प्रमुख को भी मामले से अवगत करा चुके,उनका रवैया उदासीन
सोनभद्र। सोनभद्र में शक्तिनगर थाना अंतर्गत म्योरपुर ब्लॉक के परसवार राजा ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान एवं ग्रामीणो ने शक्तिनगर-वाराणसी मुख्य मार्ग से सटे खेल मैदान के पार्किंग वाली सरकारी भूमि पर अनाधिकृत कब्जा को हटवाने कि मांग को लेकर दोबारा शक्तिनगर थाने में पत्र सौंपकर भूमि से कब्जा हटवाने कि मांग कि है। ग्राम प्रधान अविनाश कुमार सहित दर्जनों ग्रामीणों ने पत्र में बताया कि 9 फरवरी 2025 को सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त करने कि लिए लिखित शिकायत कि गई लेकिन मौके से न मकान निर्माण सामग्री हटवाया गया और न ही अनाधिकृत कब्जा हटा। प्रतिनिधि सहित ग्रामीणों का म्योरपुर ब्लाक अंतर्गत मिसरा ग्राम पंचायत के प्रधान प्रतिनिधि पर व्यापार करने के नाम पर अनाधिकृत तौर पर लगातार सरकारी भूमि पर कब्जा बढ़ते जा रहा है। परसवार राजा के ग्रामीणों का कहना है कि सत्ताधारी दल के चुनाव चिन्ह लगे हुए वाहनों का वहां आना-जाना लगा रहता है शायद इसी का धौंस वह ग्रामीणों पर दिखाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है उनके हौसले इतने बुलंद हैं कि विरोध करने वालों को खुलेआम कहा जाता है, जो करना है कर लो हमारा कुछ नहीं होने वाला। ग्रामीणों अनुसार 9 फरवरी 2025 को भी शक्तिनगर थाने में सूचना देकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। ग्रामीणों अनुसार कथित 5/6 अप्रैल को भी उसी स्थान पर नींव बनाने का प्रयास किया गया था। सूचना पर डायल 112 पुलिस और शक्ति नगर थाना पुलिस आई निर्माण तो रुका लेकिन ठोस कार्रवाई न होने से दोबारा यह नौबत आ गई। ग्रामीणों अनुसार बीते तीन चार दिन पूर्व फिर रातों-रात टीन शेड डाल दिया गया। ग्राम प्रधान सहित दर्जनों ग्रामीणों ने हस्ताक्षरित पत्र शक्तिनगर थाने में सौंप कर कार्रवाई कि मांग कि है। ग्रामीणों अनुसार पहले शिकायत में ही अवैध कब्जे की बात लिखित रूप से देने के बाद डेढ़ वर्षो तक भूमि को कब्जा मुक्त क्यों नहीं कराया गया। सवाल यह है कि क्या खेल मैदान के सामने की यह भूमि ग्राम सभा , चारागाह , पार्किंग की श्रेणी में आती है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा, 67 के तहत ग्राम समाज एवं सराकारी भूमि पर अवैध कब्जे की जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों अनुसार पुलिस को अतिक्रमण हटाने का अधिकार भले न हो लेकिन शांति व्यवस्था बनाए रखने, किसी भी सरकारी भूमि पर कब्जा न होने देने तथा राजस्व विभाग की पैमाइश के दौरान सहयोग करना उनके दायित्वों में। अप्रैल 2025 में डायल 112 पुलिस ने निर्माण रुकवाकर अपनी भूमिका निभाई, लेकिन उसके बाद राजस्व विभाग को रिपोर्ट क्यों नहीं भेजी गई, इसका जवाब नहीं है। क्या कार्रवाई हो सकती है नियमानुसार अगर अवैध कब्जा पाया जाता है तो कब्जाधारी से भूमि की मालियत का 50 गुना तक जुर्माना वसूले जाने सहित कब्जा हटाये जाने का सरकारी खर्च भी उसी से वसुला जाए । ग्रामीणों ने दुद्धी तहसीलदार से स्वत: मामले का संज्ञान लेकर भूमि की पैमाइश कराकर खसरा खतौनी में दर्ज श्रेणी सार्वजनिक कर यदि कब्जा पाया जाता है तो धारा-67 के तहत बेदखली की कार्रवाई करना चाहिए। अब सवाल यह है कि 9 फरवरी 2025 की शिकायत पर लेखपाल से आख्या क्यों नहीं मंगाई गई। अप्रैल 2025 में पुलिस के रोकने के बाद निर्माण सामग्री जब्त क्यों नहीं हुई। जिस भूमि पर पंचायत यात्री प्रतीक्षालय और सार्वजनिक शौचालय बनाना चाहती है, वहां निजी व्यक्ति का टीन शेड कैसे खड़ा हो गया। क्या किसी जनप्रतिनिधि के लिए राजस्व संहिता के नियम बदल जाते हैं ? परसवार राजा के प्रधान अविनाश कुमार का कहना है कि गांव नहीं चाहता कि विवाद बढ़े। गांव सिर्फ इतना चाहता है कि सरकारी जमीन की निष्पक्ष पैमाइश हो जाए। ग्राम प्रधान अविनाश कुमार सहित ग्रामीणों ने पूर्व में दिए पत्र एवं वर्तमान पत्रों को शक्तिनगर थाने में सौंपकर कार्रवाई कि मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच स्वतंत्र राजस्व अधिकारी से कराई जाए और जांच पूरी होने तक वहां किसी भी तरह के स्थायी निर्माण पर रोक लगाई जाए। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी सोनभद्र का इस ओर ध्यान देकर तत्काल जांच कर कार्रवाई कि मांग कि है।
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