यूपी -सोनभद्र
दिनांक -28/10/2026
रिपोर्ट -सतीश दुबे -शत्रुघ्न कुमार
12 हजार आबादी को बसाने कि मांग कि

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सोनभद्र। सोनभद्र में शक्तिनगर स्थित एनसीएल की खड़िया ओपन कास्ट खदान का उत्पादन 15 से बढ़ाकर 20 मिलियन टन विस्तार को लेकर बुधवार को लोक सुनवाई का आयोजन किया गया की लेकिन इससे ठीक बगल में बसे चिल्काडांड गांव के पंकज कुमार ने 28 अक्टूबर को होने वाली जनसुनवाई से पहले एडीएम न्यायिक के जरिए दिल्ली में पर्यावरण मंत्रालय को आपत्ति पत्र भेजा है। पत्र में लिखा है यहां करीब 12 हजार लोग रहते हैं, पहले हमारी जान की गारंटी लो, आवेदनकर्ता का कहना है फिर खदान बढ़ाओ।
चिल्काडांड कोई नया गांव नहीं है। 1976-77 में जब एनटीपीसी सिंगरौली बनी थी, तब विस्थापित हुए परिवारों को यहां बसाया गया था। मतलब एक बार पहले ही ये लोग उजड़ चुके हैं। अब दूसरी बार एनसीएल खड़िया की खदान, उसका ओबी का पहाड़, ब्लास्टिंग और धूल ने फिर से घेर लिया है। गांव से महज 50 से 200 मीटर पर ही ओबी का विशाल पहाड़ खड़ा है। बरसात में ऊपर से मिट्टी और मलबा बहकर बस्ती की तरफ आता है। ग्रामीणों का कहना है कि खदान बंद होने के बाद भी ये पहाड़ वहीं रहेगा, तब भू-स्खलन का खतरा और बढ़ जाएगा। इसलिए मांग है कि किसी स्वतंत्र एजेंसी से इस पहाड़ की ऊंचाई, ढलान और स्थिरता की जांच कराई जाए।
पत्र में 2012 में एक हादसे के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी सोनभद्र ने संयुक्त जांच कराकर गांव को सुरक्षित जगह शिफ्ट करने का निर्देश दिया था। पंकज का कहना है कि उस आदेश की कॉपी भी लगाई है, लेकिन 14 साल बाद भी एक भी परिवार शिफ्ट नहीं हुआ। प्रशासन बताए, वो आदेश कहां दबा पड़ा है। गांव वालों कि शिकायत है कि खदान में जब ब्लास्ट होता है तो पूरे गांव में कंपन होता है, दरवाजे-खिड़कियां हिलती हैं। कई घरों में दरारें आ गई हैं। कोयला यार्ड, सीएचपी, रेलवे लाइन और भारी गाड़ियों से उड़ने वाली धूल से सांस लेना मुश्किल है। इसलिए मांग की गई है कि गांव में स्वतंत्र हेल्थ सर्वे हो, और PM10, PM2.5 की रिपोर्ट रोजाना पब्लिक की जाए। चिल्काडांड निवासी ने 12 हजार लोगों को सुरक्षित जगह समय पर बसाये जाने,खदान बंद करने से पहले माइंस क्लोजर कमेटी में इस गांव का मामला सबसे पहले सुने जाने,ओबी पहाड़ के भू-स्खलन को लेकर स्वतंत्र तकनीकी सर्वे जब तक सुरक्षा और पुनर्वास तय न हो तब तक 15 से 20 मिलियन टन प्रतिवर्ष विस्तार रोके जाने। आखिर में ग्रामीणों ने ये भी लिखा है कि इस पूरे इलाके का प्रदूषण का मामला एनजीटी में भी चल रहा है, तो मंत्रालय फैसला लेते वक्त उन आदेशों को भी देखे।
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