यूपी -सोनभद्र
दिनांक -13/10/2026
रिपोर्ट – सतीश दुबे -शत्रुघ्न कुमार
सूत्रों अनुसार श्रमिकों को नकदी भुगतान कर पैसे ले लेने कि चर्चाएं, जल्द खुलासा
क्या मधुकान कंपनी में जिम्मेदारो कि मिलिभगत से हो रहा भ्रष्टाचार?
कथित श्रमिकों ने लंबे समय से समय पर वेतन भुगतान, नकदी भुगतान को लेकर नाराज
सवाल क्या तय न्यूनतम वेतन का भुगतान नहीं कर रही कंपनी जांच का विषय ?
सवाल क्या इससे श्रमिकों के पीएफ व मूल सुविधाओं पर डाका नहीं
क्या तीन माह पूर्व अनियमितताओं को लेकर हुए धरना कके समझौते का उल्लंघन नहीं?
अनियमितताओं में सुधार के आश्वासन के बाद भी एनसीएल के अधिकारी चुप क्यों ?
सवाल अब भी क्यों श्रमिकों को शोषण उस दौरान कार्रवाई का आश्वासन मिला तो एनसीएल बीना के जिम्मेदार मौजूद थे ?
सूत्रों का कहना एनसीएल व कंपनी प्रबंधन के एक दिन बाद भुगतान के आश्वासन पर काम पर लौटे श्रमिक
सवाल क्या यह जांच का विषय नहीं न्यूनतम वेतन भुगतान व नकदी भुगतान बड़ा भ्रष्टाचार नहीं?
कथित श्रमिकों ने जिलाधिकारी से जांच कर कार्रवाई कि मांग कि
सोनभद्र। सोनभद्र में एनसीएल बीना कोल परियोजना में मंगलवार को श्रमिकों ने समय पर वेतन भुगतान, नकदी भुगतान व अन्य अनियमितताओं को लेकर कार्य ठप कर दिया। देर शाम एनसीएल बीना परियोजना के जिम्मेदार अधिकारियों व कंपनी के जिम्मेदारो के बीच एक दिन में वेतन भुगतान करने के आश्वासन पर सभी काम पर लौट गए। बीना परियोजना में सीएचपी कार्य कर रही मधुकान प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के कथित ऑपरेटरों और श्रमिकों ने लंबे समय से समय पर वेतन का भुगतान न करने, वेतन भुगतान नकदी कर वापस ले लेने सहित अन्य अनियमितताओं का लगातार जारी रहने का आरोप लगाया है सूत्रों का व चर्चाओ सहित बड़ा सवाल यह भी है कि क्या इससे उनके पीएफ व अन्य सुविधाओं पर असर नहीं पड़ रहा है। आपकों बता दें इसके पूर्व भी जब से मधुकान कंपनी सीएचपी कार्य कर रही थी मजदूरों का आरोप है कि तब से कंपनी पर अनियमितताओं का आरोप लगता रहा है। कंपनी पर ओवरटाइम कराने के बाद उस भुगतान नहीं करना, वेतन में कटौती,समय पर वेतन भुगतान, कथित नकदी भुगतान देकर कुछ वापस ले लेना, नियमानुसार तय न्यूनतम वेतन भुगतान न करना, ओवरटाइम कार्य कराकर भुगतान न करना सहित मूलभूत सुविधाओं को भी मुहैया न कराने के आरोप लगते रहे हैं। बीते जुलाई माह में भी अनियमितताओं को लेकर धनरा भूख हड़ताल हुआ था जिसके बाद एनसीएल बीना प्रबंधन व कंपनी प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारियों के आश्वासन के बाद धरना,भूख हड़ताल समाप्त हुआ था। इसके बावजूद अब भी हालात जस के तहत बने हुए हैं,और एनसीएल बीना परियोजना के जिम्मेदारो के चुप्पी साधे रहने पर क्या बड़ा सवाल खड़े नहीं कर रहा है? बड़ा सवाल क्या प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों ने बताया कि कई श्रमिकों को बैंक खाते में पैसा न देकर हाथ में नगदी भुगतान कर फिर वापस लिया जाता है? जिससे पीएफ और बाकी सुविधाओं को भी क्षति पहुंच रही हैं । श्रमिकों के कार्य ठप करने कि सूचना पर एनसीएल बीना परियोजना व कंपनी प्रबंधन के जिम्मेदार मौके पर पहुंचकर कथित श्रमिकों एक दिन में भुगतान करने का समय मांग के आश्वासन के बाद श्रमिक कार्य पर वापस लौट गये। क्या सवाल यह नहीं है कि इतने लंबे समय से मधुकान कंपनी में श्रमिकों का शोषण हो रहा है और एनसीएल बीना प्रबंधन के जिम्मेदार हर बार कार्रवाई व न्याय करने का आश्वासन क्यों देते हैं? कौन सी जांच कमेटी कंपनी कि खामियों का जांच कर रही है? और करीब तीन माह बीतने के बाद भी कंपनी पर कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या यह सवाल नहीं है कि जब इतने लंबे समय से कंपनी पर श्रमिकों ने अनियमितताओं का आरोप लगाया तो एनसीएल बीना परियोजना के जिम्मेदारो को स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए? जिलाधिकारी सोनभद्र को मामले में संज्ञान लेकर श्रमिकों के साथ न्याय और कंपनी पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए?
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