यूपी -सोनभद्र
दिनांक -01-11-2026
रिपोर्ट -सतीश दुबे

बीना/सोनभद्र। म्योरपुर ब्लॉक के गोविंदपुर स्थित सामाजिक संस्थान बनवासी सेवा आश्रम में दो दिवसीय ग्राम स्वराज सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन के पहले दिन पंचायतीराज व्यवस्था को मजबूत बनाने, ग्राम स्वराज की अवधारणा, पर्यावरण संरक्षण और सिंगरौली परिक्षेत्र में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इससे पूर्व शिवनारायण एवं प्रेमदयाल भाई ने गीत प्रस्तुत कर सम्मेलन का माहौल बनाया।
इस दौरान देवनाथ भाई ने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्राम स्वराज के पांच स्तंभों पर प्रकाश डालते हुए लोकतंत्र से ग्राम स्वराज की स्थापना, नैतिक विचार, प्रबोधन यात्रा और ग्रामीण विकास में महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
वहीं रमेश भाई ने क्षेत्र की 28 ग्राम पंचायतों में निकाली गई प्रबोधन यात्रा का उल्लेख करते हुए वार्ड सदस्यों की भूमिका और आगामी पंचायत चुनावों की तैयारियों पर चर्चा की। उन्होंने सांवा के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने तथा युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील की।
उमेश चौबे ने ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों के नियमित उपयोग, टीकाकरण, आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका, पंचायत कोष की राशि और ग्राम पंचायतों की स्वयं की आय के स्रोतों के बारे में जानकारी दी।
ब्लॉक प्रमुख (प्रशासक) मानसिंह गोंड ने कहा कि ग्राम स्वराज की अवधारणा से ग्राम पंचायतें मजबूत होती हैं। उन्होंने रासायनिक खेती के दुष्परिणामों की जानकारी देते हुए किसानों को जैविक खेती अपनाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधरोपण करने का आह्वान किया।
सिंगरौली परिक्षेत्र के प्रदूषण पर उठे गंभीर सवाल
सम्मेलन में सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी के संयोजक रामेश्वर प्रसाद ने औद्योगिक कंपनियों, कोयला खदानों और बिजली परियोजनाओं से क्षेत्र में हो रहे वायु एवं जल प्रदूषण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने प्रदूषण से प्रभावित क्षेत्रों और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
पर्यावरण कार्यकर्ता जगत नारायण विश्वकर्मा ने एम्स भोपाल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रदूषण से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में खांसी, बलगम, खांसी में खून आने, मसूड़ों में सूजन एवं खून आने तथा त्वचा संबंधी समस्याओं के लक्षण बड़ी संख्या में लोगों में पाए जाने की बात सामने आई है। उनके अनुसार सिंगरौली परिक्षेत्र में बच्चे शत-प्रतिशत धूल के संपर्क में हैं, जबकि 71 प्रतिशत बच्चे खांसी से प्रभावित बताए गए हैं।
बनवासी सेवा आश्रम की मंत्री शुभा प्रेम ने एनजीटी के आदेशों, टॉक्सिकोलॉजिकल लैब की स्थापना तथा प्रदूषण से प्रभावित लोगों को मुआवजा दिलाने के संबंध में न्यायालय के आदेशों की जानकारी दी।
विशिष्ट अतिथि एवं सर्व सेवा संघ से जुड़े अरविंद अंजुम ने देश की आजादी से पहले और बाद की सामाजिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों पर अपने विचार रखे। वहीं मुख्य अतिथि प्रो. संजय सिंह ने समाज में भ्रूण हत्या, स्त्री-पुरुष के बीच भेदभाव और लैंगिक समानता जैसे गंभीर सामाजिक विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम का संचालन शिवशरण भाई ने किया, जबकि अध्यक्षता तीसरी सरकार के संस्थापक चंद्रशेखर प्राण ने की।
इस अवसर पर सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार, वीरेंद्र राय, निलेश पासवान, यशवंत मिश्र, मुरली श्याम तिवारी, विमल भाई, अशोक, शिवनारायण, प्रदीप, सुरेश, रामविचार गौतम, प्रेमदयाल, रामचंद्र दुबे, प्रशांत दुबे, यस्वी पांडेय, नीता सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित रहे।
सम्मेलन के माध्यम से ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने, ग्रामीण स्वावलंबन, जैविक खेती, महिला सशक्तीकरण और प्रदूषण से प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य एवं अधिकारों को लेकर सामूहिक जागरूकता का संदेश दिया गया।
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