यूपी -सोनभद्र
दिनांक -18/6/2026
रिपोर्ट -सतीश दुबे -शत्रुघ्न कुमार

runfunc: 0; algolist: 0;
multi-frame: 1;
brp_mask:0;
brp_del_th:0.0000,0.0000;
brp_del_sen:0.0000,0.0000;
motionR: 0;
delta:1;
bokeh:1;
module: photo;hw-remosaic: false;touch: (-1.0, -1.0);sceneMode: 12582912;cct_value: 0;AI_Scene: (-1, -1);aec_lux: 132.34912;aec_lux_index: 0;albedo: ;confidence: ;motionLevel: -1;weatherinfo: weather?Hazy sunshine, icon:14, weatherInfo:100;temperature: 44;zeissColor: bright;
सिख संगत द्वारा गुरुद्वारा में प्रार्थना व कीर्तन किए गए
राहगीरों को ठंडा पानी मीठे दूध का छबीला की सेवा दी गई
इतिहास के पहले शहीद के रुप में जाना जाता है
गुरु ग्रंथ साहिब में सर्वाधिक वाणी गुरु अर्जन देव जी की
गुरु अर्जन देव जी ने ही गुरु ग्रंथ साहिब का संकलन किया और स्वर्ण मंदिर की नींव रखी
सोनभद्र। बीना परियोजना आवासीय परिसर स्थित मुख्य द्वार पर सिखों के पांचवें गुरु के रूप में जाने जाने वाले गुरु अर्जन देव 15 अप्रैल 1563- 30 मई 1606 को उनके शहादत दिवस पर याद किया गया। गुरु अर्जन देव जी का शहीदी दिवस सिख धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्रतम दिनों में से एक है। यह उनके अदम्य साहस , धर्म की रक्षा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान और मानवता के प्रति उनके समर्पण की याद दिलाता है। मुगल सम्राट जहांगीर ने उनके बढ़ते प्रभाव और धर्म संदेश का विरोध किया और उन्हें इस्लाम स्वीकार करने का आदेश दिया। गुरु जी द्वारा ऐसा करने से इनकार करने पर उन्हें लाहौर में भीषण शारीरिक यातनाएं दी गईं। तपते हुए लोहे की चादर पर बिठाया गया और उनके शरीर पर उबलती हुई रेत डालघ गई, इस असहनीय पीडा यातनाओं के बावजूद वे अपने सिद्धांतों और सत्य के मार्ग से भीगे नहीं और अंततः रावी नदी में ज्योति – ज्योत समा गए। इस अवसर पर गुरप्रीत,रॉकी सिंह एवं कमेटी के समस्त वरिष्ठ जन उपस्थित रहे..
News Point 24×7

News Point 24×7