यूपी -सोनभद्र
दिनांक -28/7/2026
रिपोर्ट -सतीश दुबे -शत्रुघ्न कुमार

सोनभद्र। उत्तर प्रदेश में संपत्तियों के नये मूल्यांकन,सर्किल रेट( नवीन दर सूची)को लेकर ओबरा तहसील और उप निबंधक सब रजिस्ट्रार को कार्यालयों में वकीलों (अधिवक्ताओं) द्वारा नारेबाजी कर माननीय स्टांप एवं पंजीयन मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार के नाम नये एकीकृत दर सूची और नियमों में बदलाव के बाद कई स्थानों पर विसंगतियों या दरों में संशोधन की मांग को लेकर अधिवक्ता संघर्ष समिति ने ज्ञापन सौंपा। प्रस्तावित सूची को अधिक जटिल व 6 चरणों में इस तरह तैयार किया गया है जिसे समझना सामान्य नागरिकों के साथ ज्यादातर अधिवक्ताओं एवं विभागीय अधिकारियों के लिए भी कठिन हो गया है। शासन का उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी एवं जनहितकारी बनाना होना चाहिए लेकिन विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा तैयार कि जा रही यह व्यवस्था विपरीत लगती है। जिस कारण नागरिकों को भ्रम व कठिनाईयो का सामना करना पड़ेगा। संघर्ष समिति के संयोजक एडवोकेट उमेश चंद शुक्ला ने कहा कि प्रस्तावित नवीन एवं जटिल दर सूची को वर्तमान स्वरूप में लागू न किया जाए। अगर दरों में वृद्धि आवश्यक है तो वर्तमान में लागू दर सूची के आधार पर ही आवश्यक संशोधन किया जाए, जिससे व्यवस्था सरल, पारदर्शी जनहितकारी बनी रहे। जटिल व्यवस्था का असर सीधे प्रदेश सरकार के जनहितकारी छवि पर भी पड़ेगा। कहा अगर जनता अपनी ही भूमि का क्रय-विक्रय प्रक्रिया समझने में असमर्थ रही,तो शासन के प्रति असंतोष उत्पन्न होगा। पत्र में अवगत कराया कि स्टांप एवं पंजीयन मंत्री करीब चार वर्षों से सोनभद्र के प्रभारी मंत्री रहे हैं जनपद कि भौगोलिक, सामाजिक तथा आर्थिक परिस्थितियों को अच्छे से जानतें हैं इसके बावजूद एसी व्यवस्था लागू होती है, तो आमजन का शोषण या उत्पीड़न होने कि आशंका बढ़ेगी जो चिंता का विषय है। प्रस्तावित व्यवस्था में कृषि भूमि के क्रय-विक्रय के लिए ग्रामीण क्षेत्र में 300 वर्गमीटर तथा विकासशील क्षेत्र में 500 वर्गमीटर की सीमा लागू करने का प्रस्ताव जनपद के वास्तविक परिस्थितियों के अनुकूल प्रतीत नहीं होता। जिलें में अनुसूचित जाति एवं जनजाति की बड़ी आबादी निवास करती है ऐसी स्थिति में यह व्यवस्था व्यवहारिक न होकर आम नागरिकों के लिए आर्थिक व प्रशासनिक बोझ सिद्ध हो सकती है। इस अवसर पर संजय द्विवेदी, दिनेश पांडे, नंदलाल, सुशील, अर्जून,अजय, मनीष, अमित,मनोज,कमलेश, राजीव,कौशल पांडे, विरेंद्र पांडे, एसके जैन सहित अन्य अधिवक्ता उपस्थित रहे।
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