यूपी -सोनभद्र
दिनांक -23/10/2026
रिपोर्ट -सतीश दुबे -शत्रुघ्न कुमार

एनटीपीसी सिंगरौली के जिम्मेदार अधिकारियों पर आखिर क्यों न कार्रवाई हो

सोनभद्र। सोनभद्र में शक्ति नगर क्षेत्र अंतर्गत योगी चौरा पेट्रोल पंप के समीप स्थित एनटीपीसी सिंगरौली का राख परिवहन करने वाले वाहनों का लगातार सड़कों व पटरियों पर कब्जा जमाए रहना क्यों और किस नियम के तहत तहत ऐसा हो रहा है? क्यों आखिर स्थानीय प्रशासन से लेकर यातायात,आरटीओ पीडब्ल्यूडी एवं जिला प्रशासन कि कार्यशैली पर क्या यह बड़े सवाल खड़े नहीं कर रहा? 23 अक्टूबर शुक्रवार दोपहर 12 बजे से 2 बजे के बीच का यह वीडियो है, स्थान है शक्तिनगर थाना अंतर्गत योगी चौरा स्थित पेट्रोल पंप के पास के ठीक सामने वीडियो में साफ दिख रहा है कि एनटीपीसी सिंगरौली का राख परिवहन करने वाले वाहन सड़क और पटरियों पर बेतरतीब ढंग से खड़े थे। एक-दो वाहन तो डिवाइडर पर गाड़ी चढ़ाकर गए थे अगर देखना है तो वहां लगा सीसीटीवी फुटेज चेक करा लें । वीडियो में यह भी देखा जा सकता है राहगीरों को आवागमन में कठिनाई हो रही थी। यह प्रतिदिन होने वाली बात जैसे हो चला है। जिला प्रशासन अगर दोपहर का सीसीटीवी फुटेज कैमरा चेक कराएं तो सारी हकीकत सामने आ जाएगी। चालकों द्वारा किस तरह वाहनों को छोड़कर चले जाते हैं, मुख्य मार्ग किनारे बने दुकानों के सामने वाहन खड़ी कर देते हैं। जिससे सड़क व पटरियों पर प्रदूषण फैलता है। पूर्व में इसी पेट्रोल पंप के समीप राख परिवहन करने वाले वाहनों के सड़क पर खड़े रहने से सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है, फिर भी एनटीपीसी सिंगरौली के अधिकारियों, ट्रांसपोर्टर और चालकों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। भविष्य में अगर किसी भी प्रकार कि सड़क दूर्घटना में जनहानि या मौत होती है तो संबंधितो पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि नियमानुसार ये सभी वाहन मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 122, धारा 127, धारा 184 ,धारा 194 के तहत ओवरलोड परिवहन करने पर 20000 हजार रुपये जुर्माना और 2000 हजार रुपये प्रति टन अतिरिक्त जुर्माना तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 281 के तहत सार्वजनिक मार्ग पर बाधा उत्पन्न करना नहीं प्रतीत होता है। राख परिवहन के लिए सीपीसीबी गाइडलाइन 2013 और पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना 2021 के अनुसार राख का परिवहन बंद कंटेनरों में करना है, सड़क पर गीली या सूखी राख नहीं गिरनी चाहिए। तिरपाल तो लगाते हैं लेकिन तिरपाल फटा, ढीला होता है जिससे राख उड़ती है, ये यीपीपीसीबी के नियम का उल्लंघन है। इस पर जल अधिनियम 1974 की धारा 24 और वायु अधिनियम 1981 की धारा 21 के तहत कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए? क्या एनटीपीसी के पर्यावरणीय स्वीकृति में नहीं लिखा है, कि फ्लाई ऐश बंद कंटेनर में, बिना ओवरलोड के होना चाहिए ? सबसे बड़ा सवाल ये है कि पुलिस, आरटीओ, पीडब्ल्यूडी विभाग कार्रवाई के नाम पर दो दिन वाहनों को पकड़ेंगे चालान करेंगे, इसके बाद कार्रवाई ठंडे बस्ते में क्यों चले जाती है? क्या यह कोरम पूर्ति नहीं है? आखिर हर दिन अभियान क्यों नहीं चलाया जाता? यह बड़ा सवाल है? अगर नियम हर दिन के लिए है तो अभियान हर दिन क्यों नही? जिलाधिकारी चर्चित गौड़ और एसपी मामले को संज्ञान में लेकर हर-दिन कि पेट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज निकलवाकर वस्तुस्थिति फुटेज देखकर हकीकत समझ सकते हैं। जिससे जिला प्रशासन को फुटेज के आधार पर वाहनों, चालकों, ट्रांसपोर्टरों और एनटीपीसी सिंगरौली के जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने में सहायता मिलेगी।
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